Thursday, 5 January 2012

फणीश्‍वरनाथ रेणु

फणीश्‍वरनाथ रेणु
जन्‍म - 4 मार्च, 1921
निधन - 11 अप्रैल, 1977
आजादी के बाद देश की स्थितियां इनकी रचनाओं में खुलकर सामने आई हैं। पहले उपन्यास मैला आंचल के लिए इन को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनकी रचनाएं ग्रामीण जीवन की आशा-आकांक्षा, मजबूरी-गरीबी का जीवंत दस्‍तावेज हैं।
जन्म : 4 मार्च, 1921
जन्म-स्थान : औराही हिंगना, जिला पूर्णिया, बिहार, भारत।

फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म बिहार के अररिया जिले के फॉरबिसगंज के निकट औराही हिंगना ग्राम में हुआ था । प्रारंभिक शिक्षा फॉरबिसगंज तथा अररिया में पूरी करने के बाद रेणु मैट्रिक नेपाल के विराटनगर के विराटनगर आदर्श विद्यालय से कोईराला परिवार में रहकर की । 1942 में इन्टरमीडिएट काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से की,  जिसके बाद वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पङे । बाद में 1950 में उन्हो़ने नेपाली क्रांतिकारी आन्दोलन में भी हिस्सा लिया जिसके परिणामस्वरुप नेपाल में जनतंत्र की स्थापना हुई । 1952-53 के समय वे भीषण रूप से रोगग्रस्त रहे थे जिसके बाद लेखन की ओर उनका झुकाव हुआ । उनके इस काल की झलक उनकी कहानी तबे एकला चलो रे में मिलती है । उन्होने हिन्दी में आंचलिक कथा की नींव रखी ।
इनकी लेखन-शैली वर्णणात्मक थी जिसमें पात्र के प्रत्येक मनोवैज्ञानिक सोच का विवरण लुभावने तरीके से किया होता था । पात्रों का चरित्र-निर्माण काफी तेजी से होता था क्योंकि पात्र एक सामान्य-सरल मानव मन (प्रायः) के अतिरिक्त और कुछ नहीं होता था । इनकी लगभग हर कहानी में पात्रों की सोच घटनाओं से प्रधान होती थी । एक आदिम रात्रि की महक इसका एक सुंदर उदाहरण है ।
रेणु जी की कहानियों और उपन्यासों में उन्होंने आंचलिक जीवन के हर धुन, हर गंध, हर लय, हर ताल, हर सुर, हर सुंदरता और हर कुरूपता को शब्दों में बांधने की सफल कोशिश की है. उनकी भाषा-शैली में एक जादुई सा असर है जो पाठकों को अपने साथ बांध कर रखता है. रेणु एक अद्भुत किस्सागो थे और उनकी रचनाएँ पढते हुए लगता है मानो कोई कहानी सुना रहा हो. ग्राम्य जीवन के लोकगीतों का उन्होंने अपने कथा साहित्य में बड़ा ही सर्जनात्मक प्रयोग किया है.
साहित्यिक कृतियां
उपन्यास
रेणु को जितनी ख्याति हिंदी साहित्य में अपने उपन्यास मैला आँचल से मिली, उसकी मिसाल मिलना दुर्लभ है. इस उपन्यास के प्रकाशन ने उन्हें रातो-रात हिंदी के एक बड़े कथाकार के रूप में प्रसिद्ध कर दिया. कुछ आलोचकों ने इसे गोदान के बाद इसे हिंदी का दूसरा सर्वश्रेष्ठ उपन्यास घोषित करने में भी देर नहीं की.
रेणु के उपन्यास लेखन में मैला आँचल और परती परिकथा तक लेखन का ग्राफ ऊपर की और जाता है पर इसके बाद के उपन्यासों में वो बात नहीं दिखी.
  • मैला आंचल
  • परती परिकथा
  • दीर्घतपा
  • कितने चौराहा
कथा-संग्रह
  • एक आदिम रात्रि की महक
  • ठुमरी
  • अग्निखोर
  • अच्छे आदमी
रिपोर्ताज
प्रसिद्ध कहानियां
  • मारे गये गुलफाम (तीसरी कसम)
  • एक आदिम रात्रि की महक
  • लाल पान की बेगम
  • पंचलाइट
  • तबे एकला चलो रे
  • ठेस
  • संवदिया
 
मारे गये गुलफाम कहानी पर तीसरी कसम नाम से राजकपूर और वहीदा रहमान की मुख्य भूमिका में प्रसिद्ध फिल्म बनी जिसे बासु भट्टाचार्य ने निर्देशित किया और सुप्रसिद्ध गीतकार शैलेन्द्र इसके निर्माता थे. यह फिल्म हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर जाती है. हीरामन और हीराबाई की इस प्रेम कथा ने प्रेम का एक अद्भुत महाकाव्यात्मक पर दुखांत कसक से भरा आख्यान सा रचा जो आज भी पाठकों और दर्शकों को लुभाता है.

No comments:

Post a Comment