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Thursday, 5 January 2012

बलराज साहनी


बलराज साहनी ( 1 मई 1913 – 13 अप्रैल 1973)
बलराज साहनी को हम एक अभिनेता के तौर पर जानते हैं। लेकिन पंजाबी साहित्य में इन का एक विशॆश स्थान है। इन्होंने कम लिखा, लेकिन जो लिखा बहुत अच्छा लिखा। दिल से लिखा। सच्चाई से लिखा। कहानियाँ लिखीं, अपनी आत्मकथा लिखी और यात्रा वृत्तांत लिखे। मेरा पाकिस्तानी सफ़रनामा, मेरा रूसी सफ़रनामा यात्रा वृत्तांत हैं। ग़ैर जज़बाती डायरी में कहानियों की ही तरह के वृत्तांत हैं।
हिन्दी में भी उन का एक संग्रह पूरब के नाई के नाम से छपा। लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें अपनी मातृ भाषा में लिखना चाहिए। और तभी से उन्होंने पंजाबी में लिखना शुरू किया। उन्हें पढ़ने पर एहसास होता है कि बहुत बड़े अभिनेता होते हुए भी वे आम जनता के कितने नज़दीक थे। गुरुदेव टैगोर के शान्तिनिकेतन में दो साल के लिए अध्यापक रहे, गाँधी जी के सेवाग्राम आश्रम में भी कुछ समय लगाने वाले बलराज साहनी आम आदमी के लेखक थे – इस लिए तो उन के एक संग्रह का शीर्षक कामे (यानी काम करने वाले परिश्रमी) था। वे जन संस्कृति और पंजाबी संस्कृति के दीवाने थे। और शायद इसी लिए उन का जन्म मई दिवस पर हुआ, और मृत्यु हुई पंजाब के त्यौहार बैसाखी के दिन!
आप यह तो जानते ही होंगे कि वे भीष्म साहनी के बड़े भाई थे।