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Thursday, 5 January 2012

भीष्म साहनी

 
 
 

भीष्म साहनी (8 अगस्त 1915 – 11 जुलाई 2003)
भीष्म साहनी बीसवीं सदी के हिन्दी साहित्य के जाने-माने हस्ताक्षर हैं। उन्होंने कहानियाँ, उपन्यास, नाटक लिखे हैं। उन के साहित्य में हमारे समाज के मध्य वर्ग का चित्रण विशेष तौर से प्रभावशाली है हालाँकि समाज के अन्य तबकों की तस्वीर और दिन-प्रतिदिन का जीवन भी उस में उभर कर आता है। 1998 में पद्नम भूषण से सम्मानित भीष्म साहनी के साहित्य में उन के उपन्यास तमस का विशेष स्थान है जिसे साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला था। यह भारत के विभाजन की त्रासदी और आम लोगों पर उस के प्रभाव का संवेदनशील चित्रण है। छ: उपन्यास, छ: नाटक और एक सौ से अधिक कहानियाँ लिखने वाले भीष्म साहनी को पढ़ने पर आज़ादी के बाद के हमारे समाज और जीवन की एक झलक हमें मिलती है।

तमस के अलावा झरोखे, मय्यादास की माढ़ी, बसन्ती, कुन्तो और नीलू, नीलिमा, निलोफ़र उन द्वारा लिखे गए उपन्यास हैं। हानूश, आलमगीर, कबीरा खड़ा बाज़ार में, मुआवज़े उन के नाटक हैं। अमृत्सर आ गया, गंगो का जाया, अह्म ब्र्हमास्मि, चीफ़ की दावत, वान्ग चू उन की कुछ मशहूर कहानियाँ हैं।

आएँ, आप भी हमें बताएँ जो कुछ आप जानते हैं भीष्म साहनी के बारे में।